# Marwad.Org > About Marwad - South Rajasthan ## Posts - [वीर सिरोमणि राव सुरताण देवड़ा: स्वाधीनता के अमर प्रतीक और सिरोही की स्वर्णिम शौर्यगाथा](https://marwad.org/surtan-deora-sirohi/): भूमिका: आबू की पावन धरा और स्वाभिमान का सूर्य भारतीय इतिहास का पन्ना-पन्ना वीरों की गाथाओं से रंगा पड़ा है। जब-जब विदेशी या आक्रामक शक्तियों ने भारत भूमि को अपनी अधीनता की जंजीरों में जकड़ने का प्रयास किया, तब-तब इस देश के किसी न किसी कोने से स्वाभिमान की ज्वाला धधक उठी। राजस्थान का इतिहास विशेष रूप से ऐसी हुंकार का गवाह रहा है, जहाँ मातृभूमि की रक्षा के लिए सिर कटाना सम्मान की बात मानी जाती थी। जब हम मध्यकालीन भारत में मुगल सम्राट अकबर की विस्तारवादी नीतियों और राजपूत राज्यों के प्रतिरोध की चर्चा करते हैं, तो अक्सर ध्यान - [सिरनावा की पहाड़ियों में विराजीं मातर माताजी: सिरोही की चमत्कारी शक्तिपीठ का इतिहास, महिमा और धार्मिक महत्व](https://marwad.org/matar-mataji-sirohi/): राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि न केवल अपने अदम्य साहस और किलों के लिए जानी जाती है, बल्कि यह कण-कण में रची-बसी देव आस्था और प्राचीन शक्तिपीठों के लिए भी विश्व विख्यात है। इसी पावन धरा के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित सिरोही जिला अरावली की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं और घने जंगलों से घिरा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे अनादि काल से देवभूमि या ऋषियों की तपोभूमि कहा गया है। इसी सिरोही जनपद के ऐतिहासिक गांव ‘सिरनावा’ (Sirnava) की मनोरम पहाड़ियों में आस्था, शक्ति और चमत्कार का एक ऐसा ही अलौकिक केंद्र स्थित है, जिसे संपूर्ण मारवाड़, गोडवाड़ और गुजरात के सीमावर्ती - [यह गाथा है डाकू कनिया वेलिया (कल्याण सिंह और वेलाजी) की।](https://marwad.org/kaniya-veliya/): यह कहानी राजस्थान के मारवाड़ और मेवाड़ के बीहड़ों, अरावली की कंदराओं और लोक-कथाओं में अमर हो चुके एक ऐसे बागी की है, जिसे इतिहास ने डाकू कहा, लेकिन गरीबों ने उसे ‘मसीहा’ और ‘बापजी’ माना। यह गाथा है डाकू कनिया वेलिया (कल्याण सिंह और वेलाजी) की। ब्रिटिश हुकूमत के दौर और सामंतशाही के जुल्मों के खिलाफ उठी यह वह आवाज थी, जिसने राजस्थान की मरुधरा को अपने साहस और न्याय के अनोखे अंदाज से झकझोर कर रख दिया था। भाग १: जुल्म की धूप और बगावत का बीज बात बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों की है। राजस्थान की रेतीली धरती - [सिरोही री धरती रो फलो फूलो राजवी - मानसिंह देवड़ा](https://marwad.org/man-singh-deora/): राजपूताना (वर्तमान राजस्थान) की वीर प्रसूता भूमि पर कई पराक्रमी राजवंशों ने जन्म लिया, जिन्होंने अपने रक्त से स्वाभिमान और स्वतंत्रता की अमिट इबारत लिखी। इन्हीं में से एक प्रतापी राजवंश था—सिरोही के देवड़ा चौहान। जब हम सिरोही के देवड़ा राजवंश के इतिहास के पन्नों को पलटते हैं, तो राव मानसिंह देवड़ा द्वितीय (Rao Man Singh Deora II) का नाम एक अत्यंत पराक्रमी, दूरदर्शी और कलाप्रेमी शासक के रूप में उभरकर सामने आता है। उन्होंने १६वीं शताब्दी (१५६०-१५७२ ईस्वी के आसपास) में सिरोही रियासत की बागडोर संभाली। उनका शासनकाल न केवल मुगलों और पड़ोसी राज्यों के साथ राजनीतिक संघर्षों के लिए - [सिवाना का युद्ध: मरुधरा के वीरों का अदम्य साहस](https://marwad.org/sivana-yudh-rajasthan/): “गढ़ सिवाणौ ऊँणियौ, सातल सोम सुजाण। खिलजी फौजां रोकियौ, राखियौ राजस्थान।” इतिहास के पन्नों में राजस्थान का स्थान सदैव वीरता, त्याग और बलिदान के लिए सर्वोच्च रहा है। यहाँ की मिट्टी का प्रत्येक कण किसी न किसी वीर योद्धा के रक्त से सिंचित है। इसी कड़ी में सिवाना का युद्ध (Battle of Siwana, 1308) एक ऐसी ऐतिहासिक घटना है, जो अलाउद्दीन खिलजी की साम्राज्यवादी महत्त्वाकांक्षा और राजपूतों के अदम्य साहस के संघर्ष को जीवंत करती है। सिवाना का यह युद्ध केवल एक सैन्य टकराव नहीं था, बल्कि यह स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ा गया वह महासंग्राम था, जिसमें विश्वासघात ने - [इतिहास में दत्ताणी का युद्ध (Battle of Dattani) - सिरोही](https://marwad.org/battle-of-dattani/): सिरोही रियासत के इतिहास में दत्ताणी का युद्ध (Battle of Dattani) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वीरतापूर्ण अध्याय है। यह युद्ध 1583 ईस्वी में सिरोही के महाराव सुरताण और मुगल सम्राट अकबर की सेनाओं के बीच लड़ा गया था। यहाँ इस ऐतिहासिक युद्ध का विस्तृत विवरण दिया गया है: युद्ध की पृष्ठभूमि 16वीं शताब्दी में मुगल सम्राट अकबर अपनी साम्राज्यवादी नीति के तहत राजपूताना के सभी राज्यों को अपने अधीन करना चाहता था। सिरोही के शासक महाराव सुरताण एक स्वाभिमानी राजा थे जिन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया था। इस बीच, सिरोही के ही एक असंतुष्ट जगमाल (महाराणा - [जवाई बांध: राजस्थान का छिपा हुआ खजाना](https://marwad.org/jawai-bandh/): राजस्थान, जिसकी पहचान रेगिस्तान, ऊंट और राजाओं के किलों से है, वहां प्रकृति ने एक अद्भुत चमत्कार छुपा रखा है – जवाई बांध। यह सिर्फ एक बांध नहीं, बल्कि थार के रेगिस्तान में जल का एक विशाल समंदर है, जो पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग से कम नहीं है। यह स्थान रेगिस्तान की रूखी जमीन पर प्रकृति की जीत का प्रतीक है। प्यासी धरती की पुकार ऐतिहासिक रूप से, मारवाड़ (आधुनिक जोधपुर और पाली क्षेत्र) एक शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाका रहा है। यहाँ पानी की भारी कमी थी और अकाल की स्थिति आम बात थी। खेती-बाड़ी पूरी तरह - [श्री सारणेश्वर महादेव मन्दिर, सिरोही का इतिहास](https://marwad.org/shri-sarneshwar-mahadev-temple/): सिरोही राज्य की स्थापना 1206 ईस्वी सन् में हुई एवं इसके तृतीय शासक महाराव विजयराजजी उर्फ बीजड, जिनका शासनकाल 1250 से 1311 ईस्वी सन् रहा, ने इस मन्दिर की स्थापना की। 1298 ईस्वी सन् में दिल्ली के शक्तिशाली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात के सोलंकी साम्राज्य को समाप्त किया एवं सिद्धपुर स्थित सोलंकी सम्राटों द्वारा निर्मित विशाल रूद्रमाल के शिवालय को ध्वस्त किया। उसके शिवलिंग को निकाल कर खुन से लथपथ गाय के चमडे में लपेटकर, जंजीरो से बान्धकर हाथी के पैर के पीछे घसीटता हुआ दिल्ली की ओर अग्रसर हुआ। आबूपर्वत की तलेटी में बसी चन्द्रावती महानगरी पहुंचते ही सिरोही - [मारवाड़ के रक्षक वीर दुर्गादास राठौड़](https://marwad.org/veer-durgadas-rathore/): अपनी जन्मभूमि मारवाड़ को मुगलों के आधिपत्य से मुक्त कराने वाले वीर दुर्गादास राठौड़ का जन्म 13 अगस्त, 1638को ग्राम सालवा में हुआ था। उनके पिता जोधपुर राज्य के दीवान श्री आसकरण तथा माता नेतकँवर थीं। आसकरण की अन्य पत्नियाँ नेतकँवर से जलती थीं। अतः मजबूर होकर आसकरण ने उसे सालवा के पास लूणवा गाँव में रखवा दिया। छत्रपति शिवाजी की तरह दुर्गादास का लालन-पालन उनकी माता ने ही किया। उन्होंने दुर्गादास में वीरता के साथ-साथ देश और धर्म पर मर-मिटने के संस्कार डाले। उस समय मारवाड़ में राजा जसवन्त सिंह (प्रथम) शासक थे। एक बार उनके एक मुँहलगे दरबारी राईके - [मारवाड़ी के बारे में](https://marwad.org/marwadi/): (मारवाड़ी) मारवाड़ी या राजस्थानी लोगों को इंडो – आर्यन जातीय समूह, कि भारत के राजस्थान क्षेत्र में निवास कर रहे हैं. उनकी भाषा राजस्थानी इंडो – आर्यन भाषाओं के पश्चिमी समूह का एक हिस्सा है.मारवाड़ी नाम कोलकाता, जो व्यापार के लिए चले गए और कोलकाता में व्यापार करने से राजस्थान के लोगों को दिया गया था. विभिन्न मारवाड़ी व्यापार, कृषि और बाद के लिए दूर के राज्यों के लिए चले गए जातियों से कई लोग सफल हो गया. शब्द “मारवाड़ी” मारवाड़ से एक व्यापारी का उल्लेख करने के लिए एक रास्ता के रूप में पकड़ा. यह प्रयोग imprecise है. राजस्थान से - [जालोर के बारे में जानिए](https://marwad.org/jalore/): जालोर जोधपुर से 140 किलोमीटर औरअहमदाबादसे 340 किलोमीटर स्वर्णगिरी पर्वत की तलहटी पर स्थित, राजस्थान राज्य का एक खूबसूरत व ऐतिहासिक शहर और जिला है। हाल ही के दिनों में, विशेष रूप से जलोरे जिले में औद्योगिक विकास विश्व प्रसिद्ध ग्रेनाइट टाइल्स और स्लैब के कारण उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में 500 इकाइयां उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेनाइट उत्पादों का उत्पादन कर रही हैं। यह राज्य के लिए अच्छा राजस्व कमाता है; इसलिए यह राज्य के प्रमुख शहरों में से एक है। जालोर पर्यटन के क्षेत्र मे भी राजस्थान राज्य में मुख्य भूमिका निभाता है। जालोर का किला और सुधा माता मंदिर - [सिरोही जिले की जानकारी](https://marwad.org/sirohi-district/): सिरोही जिला एक नजर → सिरोही जिले का कुल क्षेत्रफल – 5,136 वर्ग किलोमीटर नगरीय क्षेत्रफल – 69.32 वर्ग किलोमीटर तथा ग्रामीण क्षेत्रफल – 5,066.68 वर्ग किलोमीटर है। सिरोही जिले की मानचित्र स्थिति – 24°15′ से 27°17′ उत्तरी अक्षांश तथा 72°16′ से 73°10′ पूर्वी देशान्‍तर है। प्राचीन काल में सिरोही को ”अर्बुद प्रदेश” प्रदेश के नाम से जाना जाता था। सिरोही जिले में विधानसभा क्षेत्रों की संख्‍या 3 है, जो निम्‍न है — 1. सिरोही, 2. पिण्डवाडा-आबू तथा 3. रेवदर उपखण्‍डों की संख्‍या – 3 तहसीलों की संख्‍या – 5 पंचायत समितियों की संख्‍या – 5 ग्राम पंचायतों की संख्‍या – - [जानिए माउंट आबू के बारे में](https://marwad.org/abu/): माउंट आबू राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित एक प्रसिद्द हिल स्टेशन है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आरामदायक जलवायु, हरी भरी पहाड़ियों, निर्मल झीलों, वास्तुशिल्पीय दृष्टि से सुंदर मंदिरों और अनेक धार्मिक स्थानों के लिए प्रसिद्द है। यह स्थान जैनियों के प्रसिद्द तीर्थ स्थानों में से एक है। यह हिल स्टेशन अरावली पर्वत की सबसे ऊँची चोटी पर 1220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। माउंट आबू अपने शानदार इतिहास, प्राचीन पुरातात्विक स्थलों और अद्भुत मौसम के कारण राजस्थान के पर्यटन के आकर्षणों में सबसे बड़ा है। अधिकांशतः गर्मियों में और मानसून के दौरान यहाँ प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक और भक्त आते - [पाली के बारे में जानिए](https://marwad.org/pali/): Pali Jila Darshan– → प्राचीन नाम- पल्किनगरी, पारा नगर, चेपावती → अन्य स्थानो के उपनाम- → मारवाड़ का अमृत सरोवर – जवाई बांध → खंभो का नगर – रणकपुर Pali District Area- 12,387km² Pali District Tahsil map- Pali (पाली) District Jila Darshan पालीPali Jila Darshan–→ प्राचीन नाम- पल्किनगरी, पारा नगर, चेपावती→ अन्य स्थानो के उपनाम-→ मारवाड़ का अमृत सरोवर – जवाई बांध→ खंभो का नगर – रणकपुरPali District Area- 12,387km²Pali District Tahsil map- परिचय ➥ प्राचीन समय में यह क्षेत्र अर्बुद प्रदेश का भाग था।➥ यहां पर रामायण व महाभारत कालीन अवशेष मौजुद है।➥ चीनी यात्री हेनसांग के भारत भ्रमण के - [राणा सांगा: मेवाड़ का वीर योद्धा और राष्ट्रनायक](https://marwad.org/rana-sanga/): भारतीय इतिहास में मेवाड़ की धरती ने अनेक वीर योद्धाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने साहस, पराक्रम और देशभक्ति से इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित किया है। इन्हीं महान योद्धाओं में से एक हैं राणा सांगा, जिन्हें मेवाड़ के गौरव और हिंदू साम्राज्य के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। राणा सांगा ने न केवल मेवाड़ को एक नई पहचान दी, बल्कि विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ अपने अदम्य साहस से भारतीय इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी। प्रारंभिक जीवन और उत्तराधिकार राणा सांगा का जन्म 12 अप्रैल, 1482 को मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश में हुआ - [जानिए वसुंधरा राजे के बारे में](https://marwad.org/vasundhara-raje/): भारतीय राजनीति की जीवंत छवि में, कुछ ही नेता राजस्थान राज्य की गतिशील और प्रभावशाली राजनीतिज्ञ, वसुन्धरा राजे के रूप में प्रमुखता से सामने आते हैं। लचीलेपन, नेतृत्व और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता से चिह्नित करियर के साथ, राजे ने भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है। इस ब्लॉग में, हम वसुंधरा राजे के जीवन, उपलब्धियों और प्रभाव का पता लगाएंगे, राजस्थान राज्य और पूरे देश में उनके योगदान पर प्रकाश डालेंगे।प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक यात्रा:8 मार्च, 1953 को ग्वालियर के शाही सिंधिया परिवार में जन्मीं, वसुंधरा राजे की रगों में बचपन से ही राजनीति दौड़ती रही। - [जानिए अशोक गेहलोत के बारे में](https://marwad.org/ashok-gehlot/): भारतीय राजनीति के विशाल क्षेत्र में, अशोक गहलोत जैसे कुछ नाम सामने आते हैं। एक अनुभवी राजनेता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के एक प्रमुख नेता के रूप में, गहलोत का शानदार करियर कई दशकों तक चला, जिसने देश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी। अपनी पूरी यात्रा के दौरान, वह अपने व्यावहारिक दृष्टिकोण, प्रशासनिक कौशल और अपने मतदाताओं के कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। इस ब्लॉग में, हम अशोक गहलोत के जीवन और करियर के बारे में विस्तार से बताएंगे, जिसमें साधारण शुरुआत से लेकर राजनीतिक पथप्रदर्शक बनने तक की उनकी उल्लेखनीय यात्रा - [राजस्थान के गाँधी - गोकुल भाई भट्ट](https://marwad.org/gokul-bhai-bhatt/): गोकुलभाई दौलतराम भट्ट (19 फरवरी 1898 – 6 अक्टूबर १९८६) का जन्म हाथळ (सिरोही) में हुआ था। उनकी माता का नाम चंपाभाई और पिता का नाम दौलतराम था। उन्होंने अपनी शरुआती पढाई मुंबई से की थी। वो एक स्वतंत्रता सेनानी और भारत में राजस्थान राज्य के एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। वह भारत की संविधान सभा के सदस्य थे जो बंबई राज्य का प्रतिनिधित्व करते थे और एक संक्षिप्त अवधि के लिए रियासत सिरोही राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने सात अन्य लोगों के साथ 22 जनवरी 1939 को सिरोही में प्रजा मंडल की स्थापना की और सिरोही के एक सक्रिय स्वतंत्रता कार्यकर्ता - [सिरोही जालोर लोकसभा सांसद देवजी पटेल](https://marwad.org/devji-patel/): सिरोही जालोर लोकसभा सांसद है देवजी पटेल। देवजी पटेल २००९ से लगातार सांसद है उन्होंने २००९, २०१४, और २०१९ में लगातार तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी के उमीदवार के रूप में जित दर्ज की। २०१९ की नरेंद्र मोदी सरकार कार्यकाल में वो कोल् और स्टील स्टेंडिंग कमिटी के सदस्य है। देवजी मानसिंगराम पटेल का जन्म २५ सितम्बर १९७६ को जाजूसन जिला जालोर में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री मानसिंगराम और माता का नाम मीरा देवी था। इनके पिता एक साधारण किसान थे और इन्होने मेट्रिक पास कर रोजगार के लिए मुंबई के तरफ कूच किया। मुंबई में इन्होने डिवाइन - [जानिए संयम लोढ़ा के बारे में - सिरोही विधायक](https://marwad.org/sayam-lodha/): संयम लोढ़ा 1998 और 2003 में कांग्रेस के विधायक रह चुके है और तीसरी बार 2018 निर्दलीय के रूप में विधायक चुने गए। संयम लोढ़ा शिवगंज (सिरोही) के रहने वाले है और उनका जन्म 20 जनवरी 1965 को सादड़ी में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रकाशराज लोढ़ा है जिन्हे नगर सेठ के रूप में जाना जाता है। संयम लोढ़ा पेशे से वकील है और राजस्थान हाई कोर्ट में सेवाएं दे चुके है। Sanyam Lodha संयम लोढ़ा को मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत का करीबी माना जाता है। संयम लोढ़ा के बोलने की शैली की वजह से तो हमेशा मीडिया में छाए रहते - [सिरोही नगर की स्थापना](https://marwad.org/sirohi/): खरगोश ने जहां दिखाई थी वीरता वहीं रखी नींव , 1425 ई . में हुई थी सिरोही नगर की स्थापना सिरोही .नगर की स्थापना आखातीज की बीज को गुरुवार के दिन १४२५ ई. में हुई थी। तब राजपूतों में आखातीज पर शिकार से वर्षभर का शकुन देखा जाता था । इसमें खरगोश का शिकार ही अनिवार्य था । महाराव सहस्त्रमल भी परंपरा कायम रखने के लिए दूज को सारणेश्वर मार्ग के बिजोला की ओर करीब ५०० घुड़सवार तथा २५ लाऊरी श्वानों के साथ रवाना हुए। राजा का कारवां गुजरने के दौरान नर खरगोश झाडिय़ों से निकला और आबू की ओर करीब - [जानिए सिरोही के इतिहास के बारे में](https://marwad.org/sirohi-history/): राजस्थान में स्थित सिरोही जिला राज्य के दक्षिण में गुजरात की सिमा से लग के में स्थित है। सिरोही जिल्ला पाली, उदयपुर जालोर और गुजरात के बनसकंठा जिले से घिरा हुआ है। सिरोही जिले का कुल क्षेत्रफल 5136 वर्गकिलोमीटर है। , जो राजस्थान राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1.52 प्रतिशत है। बांसवाड़ा और डुंगरपुर के बाद, सिरोही राजस्थान का तीसरा सबसे छोटा जिला है। सिरोही जिला पहाड़ियों और चट्टानी पर्वत से दो भागो में बट गया है। मांउट आबू के ग्रेनाइट पहाड़ ने जिले को दो हिस्सों में विभाजित किया हुआ है , जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तक चल रहा - [जानकारी माउंट आबू की - इतिहास और देखने लायक स्थान](https://marwad.org/mount-abu/): माउंट आबू राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित है। ये स्थान अरावली के पथरीले पठार पे ऊंचाई पे घने जंगलो से घिरा हुआ है। इस जगह की शांत जलवायु और ऊँचे पहाड़ पर्यटकों को आकर्षित करते है। इतिहास माउंट आबू राजस्थान का एक मात्र हिल स्टेशन है और यहाँ के प्राचीन जैन मंदिर खास का देलवाड़ा जैन मैं बहुत जाना माना है। पौराणिक कथाओ के अनुसार जब महामुनि वशिष्ठ ने धरती के असुरो के विनाश के लिए महायज्ञ किया था तब जैन तीर्थंकर महावीर यहाँ आये थे। और इस किवदंती के बाद माउंट अभी जैन धर्म मानने वालो के लिए एक ## Pages - [My account](https://marwad.org/my-account/) - [Cart](https://marwad.org/cart/) - [Videos](https://marwad.org/videos/) - [Contact](https://marwad.org/contact/): [vc_row equal_height=”yes” css_animation=”none” css=”.vc_custom_1498580074265{margin-right: -40px !important;margin-left: -40px !important;}”][vc_column offset=”vc_col-lg-6 vc_col-md-6″ css=”.vc_custom_1496932335926{border-right-width: 1px !important;padding-top: 20px !important;padding-right: 40px !important;padding-bottom: 10px !important;padding-left: 40px !important;border-right-color: rgba(129,129,129,0.2) !important;border-right-style: solid !important;}”][/vc_column][vc_column offset=”vc_col-lg-6 vc_col-md-6″ css=”.vc_custom_1496932331302{padding-top: 20px !important;padding-right: 40px !important;padding-bottom: 10px !important;padding-left: 40px !important;}”][vc_row_inner css=”.vc_custom_1484253288811{margin-bottom: 0px !important;}”][vc_column_inner width=”1/2″][/vc_column_inner][vc_column_inner width=”1/2″][/vc_column_inner][/vc_row_inner][vc_separator css=”.vc_custom_1484254145420{margin-bottom: 30px !important;}”][/vc_column][/vc_row] - [About](https://marwad.org/about/): [vc_row][vc_column][vc_column_text css=”” woodmart_inline=”no” text_larger=”no”] Marwad: Land of Valor and Heritage Marwad (or Marwar) is a historic and culturally rich region located in the western part of the Indian state of Rajasthan. The name “Marwad” is derived from the Sanskrit word ‘Maruwat’, meaning the region of deserts. 📍 Geography and Climate Marwad primarily lies in the Thar Desert, with arid and semi-arid landscapes. It includes modern districts such as: The climate is hot and dry for most of the year, with scarce rainfall and extreme temperature variations between day and night.   [/vc_column_text][/vc_column][/vc_row] - [Blog](https://marwad.org/blog/) - [Privacy Policy](https://marwad.org/privacy-policy/): Who we are Suggested text: Our website address is: https://marwad.org/. Comments Suggested text: When visitors leave comments on the site we collect the data shown in the comments form, and also the visitor’s IP address and browser user agent string to help spam detection. An anonymized string created from your email address (also called a hash) may be provided to the Gravatar service to see if you are using it. The Gravatar service privacy policy is available here: https://marwad.org/. 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